मुझे शौक है।

मुझे शौक है, 

उन चेहरों से रूबरू होने का, 

 जो बहुत कुछ दफन कर लेती है अंदर, 

 लेकिन उनकी कुर्बानी को समझे कौन। 

 

मुझे शौक है, 

स्त्रियों के चेहरे के तनाव से मिलने का, 

  जिनके तनावी रोमों के गड्ढे साफ झलकते हैं, 

 पर उन गड्ढों की नींव तक जाए कौन । 

 

मुझे शौक है, 

उन कर्मचारियों की परछाई से बात करने का, 

 जिनकी परछाई भी अनुभवों के गहरे घाव सुना जाती है, 

 पर गहरे घावों को सहलाए कौन । 

  

मुझे शौक है, 

बुढ़ापे की उन सलवटों से बात करने का, 

जो बहुत कुछ कहना चाहती हैं, लेकिन उन सलवटों की सुने कौन । 

 

मुझे शौक है, 

उन बच्चों से तफ्तीश करने का, जो बिना कारण बताएं आत्महत्या की सोचते हैं, 

 लेकिन उनके हृदय को टटोले कौन । 

 

मुझे शौक है

उन महिला कर्मचारियों को सुनने का, 

 जो दब जाती है दोयम जिम्मेदारी के बोझ तले, 

 लेकिन उनकी भावनाओं की कद्र करे कौन। 

 

मुझे शौक है, 

उन गृहस्थ स्वामिनियों की गहराई तक जाने का, 

जो सुबह से शाम तक बच्चों व पति तक रह जाती है, 

 लेकिन उनकी परेशानी को समझे कौन । 

 

मुझे शौक है, 

 उन बालिगों की गलियों तक जाने का, 

 जो मनमर्जी अपना ब्याह कर लेते हैं, 

जीते जी छुरी से रेत देते हैं गला बाप का, 

उस बाप की परवाह करे कौन।


तारीख: 17.09.2025                                    बबिता कुमावत




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